The Choice Between Complaints, Learning and Handling

Hello friends, I hope you all are doing well in your life.

We have all been at home for the last few days, whether we want or not. And at the same time, we have attached ourselves with many tasks for this, without any hassle, whether we are debating our surroundings or things or questioning the people or the government.
 Some of us are getting worried about this time while on the other hand some are enjoying this time in a better way.  Because pleasure is always within us but we just keep searching for it in other things, that's why we get bored with those things.

 It is very easy to understand all these things, we just have to ask ourselves a question.  Like why suddenly you get bored of all the things that once used to be a great medium of your pleasure.  Then whether it is your favorite music or a special place or perhaps a special kind of delicious food or someone who meant something to you or something else.
 If we consider all these things, then the question must be coming in our mind that if pleasure is within us then why would anyone want to hurt oneself.

 See, it is very important to understand that "What life throws at us is not our choice, what we make from it is entirely our choice."  Thus, we have only two options, either make the best out of the possibilities given by life or blame life for those possibilities.
 If we just keep complaining, then whatever we do, we feel like a war because the end of complaints is not possible.  On the contrary, if we can contribute to make the world better, it would be a great thing.

 We have to understand that uncertainty is the way of life.  If we do not learn how to draw on the uncertainties of life, we will never be able to live with joy and enthusiasm.  Because realistically our life system keeps changing all the time whether we look at it or not.
 Most of us want certainty in our lives but the nature of our existence is such that it is constantly changing because it is uncertain.  In this world nothing is certain except death, so if you want to move towards certainty, then surely you are moving towards death at a slow pace.

 To understand this, we go back a bit in our life. When we were children, we were definitely a life full of joy and excitement. But now we are slowly just airing. Because even though our physical energy decreases with aging, the vitality cannot decrease. Therefore, we should consider it. Because if we are alive then anything can happen.

 So if we do everything that we do with full participation and desire, then this life is our heaven.  And conversely, if we do any of our work with resistance and lack of  participation, then life will definitely feel like hell.  Surely we can choose either of these two possibilities.
 If we continue to do something irrespective of anything, then we feel all right.

  Therefore, now is the time to give ourselves and find out the various levels of our madness and cure it because even if we do not control the world, we can direct ourselves to a better level.
 We should keep doing something appropriate except our complaints because we are not unhappy with our work, we are not unhappy with the holiday (break ), we are just unhappy with our nature of mind.

 Therefore, we spend our valuable time in making complaints or vice versa learning and handling, it  is definitely our choice.

 Thank you.
Hindi Translation: नमस्कार दोस्तों,  मुझे आशा है कि आप सभी अपने जीवन में अच्छा कर रहे होंगे।

हम सभी पिछले कुछ दिनों से चाहते हुए या ना चाहते हुए भी घर पर हैं। और साथ ही हमारा वक्त बिना परेशानी के बीते इसके लिए हम खुद को कई कार्यो से भी जुड़े हुए हैं फिर चाहे हम अपने आसपास के माहौल या चीजों पर वाद-विवाद कर रहे हों या लोगों या सरकार पर सवाल उठा रहे हों। 
इस समय को लेकर हम में से कुछ लोग परेशान हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ इस समय का बेहतर तरीके से आनंद उठा रहे हैं। क्योंकि आनंद हमेशा हमारे भीतर होता है पर हम बस इसे दूसरी चीजों में खोजते रहते हैं इसीलिए शायद हम उन चीजों से उब जाते हैं।

इन सभी बातों को समझना बड़ा आसान है हमें बस खुद से एक प्रश्न करना होगा। जैसे कि क्यों अचानक कुछ ही समय में आप उन सभी चीजों से ऊब जाते हैं जो कभी आपके आनंद का एक बहुत बड़ा माध्यम हुआ करती थीं। फिर चाहे वह आपका पसंदीदा संगीत हो या कोई विशेष स्थान या शायद किसी विशेष प्रकार का स्वादिष्ट भोजन या कोई व्यक्ति जो आपके लिए मायने रखता था या कुछ और ।
अगर हम इन सभी बातों पर गौर करें तो हमारे मन में यह प्रश्न अवश्य आ रहा होगा कि यदि आनंद हमारे भीतर है तो क्यों कोई खुद को ही दुख पहुंचाना चाहेगा।

देखिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि "जीवन हम पर क्या फेकता है वह हमारा चुनाव नहीं है, हम उससे क्या बनाते हैं वह पूरी तरह से हमारा चुनाव होता है।" इस प्रकार हमारे पास दो ही विकल्प हैं या तो जीवन द्वारा दी गई संभावनाओं से कुछ बेहतरीन बनाएं या उन संभावनाओं के लिए जीवन को दोष दें।

अगर हम बस शिकायतें करते रहेंगे तो फिर चाहे हम जो भी करें, हमें हर काम एक युद्ध के समान लगता है क्योंकि शिकायतों का अंत संभव नहीं है। इसके विपरीत यदि हम दुनिया को बेहतर करने में अपना योगदान दे सकें तो एक शानदार बात होगी।
हमें यह समझना होगा कि अनिश्चितता ही जीवन का तरीका है। अगर हम यह नहीं सीखते कि जीवन की अनिश्चितताओं पर कैसे नांचे तो हम कभी भी आनंद और उत्साह के साथ नहीं जी सकेंगे। क्योंकि वास्तविक रूप से हमारी जीवन प्रणाली हर वक़्त बदलती रहती है चाहे हम उस पर गौर करें या ना करें।

हम में से  ज्यादातर लोग अपने जीवन में निश्चितता लाना चाहते हैं परंतु हमारे अस्तित्व की प्रकृति ही ऐसी है की यह लगातार बदल रही है क्योंकि यह अनिश्चित है। इस दुनिया में मृत्यु के अलावा और कुछ भी निश्चित नहीं इसलिए यदि आप निश्चितता की तरफ बढ़ना चाहते हैं तो निश्चित रूप से आप धीमी गति से मौत की तरफ बढ़ रहे हैं।
इसे समझने के लिए हम अपने जीवन मैं थोड़ा पीछे चलते हैं जब हम बच्चे थे तो निश्चित रूप से हम आनंद और उत्साह से भरा जीवन थे। परन्तु अब हम धीरे-धीरे बस अकड़ते जा रहे हैं। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ भले ही हमारी शारीरिक ऊर्जा कम हो गयी हो परंतु जीवंतता कम नहीं हो सकती। इसलिए हमें इसपर विचार करना चहिये। क्योंकि यदि हम जिंदा हैं तो कुछ भी हो सकता है। 

तो हर वो चीज जो हम करते हैं उसे यदि पूरी भागीदारी और इच्छा के साथ करते हैं तो यह जीवन ही हमारा स्वर्ग है। तथा इसके विपरीत यदि हम अपने किसी भी काम को प्रतिरोध और भागीदारी की कमी के साथ करते हैं तो जीवन निश्चित रूप से नरक की भांति महसूस होगा। निश्चित रूप से हम इन दोनों संभावनाओं में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं।

यदि हम किसी भी चीज पर ध्यान दिए बिना कुछ ना कुछ करते रहें तो हमें सब ठीक लगता है।
 इसलिए अभी यह समय खुद को देने और अपने पागलपन के विभिन्न स्तरों का पता लगाकर उसे ठीक करने का है क्योंकि दुनिया को ठीक करना भले ही हमारे वश में ना हो पर हम खुद को बेहतर स्तर पर निर्देशित अवश्य कर सकते हैं।
हमें अपनी शिकायतों को छोड़कर कुछ ना कुछ उचित करते रहना चाहिए क्योंकि हम अपने काम से दुखी नहीं है, हम छुट्टी से भी दुखी नहीं है, हम तो बस अपनी मन की प्रकृति से दुखी है।

इसलिए, हम अपने इस बहुमूल्य समय को शिकायतें करने में या इसके विपरीत सीखने व संभलने में लगाते हैं यह चुनाव निश्चित रूप से हमारा है।

धन्यवाद।

Yogesh Maurya

Author & Editor

Hi! I introduce myself as Yogesh Maurya and I'm still a student. I'm little complecated. In short, "It is not possible for everyone to read me... I'm the book in which emotions are written instead of words..."

50 komentar:

  1. Replies
    1. Nice thought. But its all about your way of thinking. Like a coin which is having two phase... Its depend on us either we choose head or tail...

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    2. I am thankful for your words🙏...
      Yes, this is my way of thinking, but it is not about me and you, that's why we talked about the two sides of the coin, but the choice is still yours.

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  2. What a word yogesh seriously I appreciate you 👍

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  3. शालीन शैली में साहित्यक प्रयोग

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  4. https://mynewbloge01.blogspot.com
    trafffic issue

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  5. भाई हमारे लिए लिखेंगे ? हम भी लखनऊ के हैं।

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    1. धन्यवाद मित्र, परंतु हमारे पास समय की अत्यधिक कमी के कारण हम आपकी सहायता करने में असमर्थ हैं। 🙏

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  6. https://newworldproduucts.blogspot.com/

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  7. Your writings are Amazing

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  8. Great post. I agree with your post and really there is only this way of looking at it. A new fan here!

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    1. Thank you ma'am, I really appreciate your words.🙏

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  9. Thanks for sharing this great information.

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  10. This is universal truth, useful content.

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