A Mindful Conflicts of Changing Our Morality

Some basic points in a moral conflict, people have the ability to handle their conflict differently, a way in which people can change the pattern of conflict. Here we may know our real identity and quality of life, Inner happyness and peace, calm. Moral understanding is not the only thing that changes as people mature. People's values tend to change over time as well. It is a good idea to become more conscious of your true current values, Moral or Value Conflicts, Moral Conflicts, Morality, Moral Relativism, Ethics, Values and Morals Clarification, Moral alchemy, Moral Reasoning.

Namaskaram, I hope you all are healthy and doing well in your life.

As you can understand that I am not a professional writer. I just try to present my thoughts, experiences and analysis to you through writing. You may or may not associate yourself with those thoughts and facts, it depends entirely on your current state of mind.

 We can also understand it in such a way that when we are children we are taught morality by our parents and many others to save us from straying and getting stumbles. But over time, most of us become accustomed to those moral thoughts which later change into our beliefs. Then our beliefs become so strong that it is impossible to change them even under any special circumstances.  Which has a direct impact on our mental system and future.  Our beliefs affect us in such a way that we stop thinking on the basis of the present situation.
 
I am not saying that morality does not guide us. But the question is whether the path chosen by us on the basis of morality and belief is indeed correct or not, how will it be determined?
 Let us try to understand it. We must have seen ourselves and those around us engaging in many tasks. Regardless of whether the work is done with or without a particular position, the question that comes to the mind of most of us is that what we are doing today, is it really that we were born on this earth to do it?  Huh?
 
More than 90% of people all over the world engage in such things that they themselves are not happy with.
 Basically our problem is-

"How do we know what our real identity is? What actions and possibilities are we born to? That is, how do we know ourselves fully?"

 See, we are paying a lot of attention to everything around us but are not paying enough attention to ourselves. The quality of our life is basically determined by how we keep ourselves.
 
How we are dressed at this time, what kind of accessible things we have, what kind of house we live in, all these things do not determine the quality of our life. "How happy we are feeling within us at this moment is what determines the quality of our life."  But we have not paid much attention to it.

We feel that this will come out as a particular outcome and we aim impossible for our happiness. Like if I want to be happy then my wife should be like this, my husband should be like this, my friend should be like this, my child should be like this, my parents should be like this, the world should be like that  and many more.  We are keeping such impossible conditions for our happiness and peace.  Conversely, if we start thinking on things instead of following them, some better results can come out.

 See, we have to understand that our morals and beliefs help us only to a certain time frame.  Because over time things and possibilities change in a way where our beliefs become meaningless.

Therefore, we should not determine our present problems and situations on the basis of morality and beliefs, but only by our proper thoughts and possibilities, because our contemporary thoughts guide us properly. We have to pay attention to it.
Thank you!

हमारी नैतिकता को बदलने का एक मनमोहक टकराव

नमस्कार, मुझे आशा है कि आप सभी स्वस्थ होंगे और अपने जीवन में अच्छा कर रहे होंगे।
जैसा कि आप समझ सकते हैं कि मैं कोई पेशेवर लेखक नहीं हूं। मैं तो बस अपने विचारों, अनुभावों तथा विश्लेषण को लेखन के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। आप उन विचारों और तथ्यों से खुद को जोड़ भी सकते हैं और नहीं भी, यह पूर्णतया आपके वर्तमान मनोस्थिति पर निर्भर करता है।

हम इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि जब हम बच्चे होते हैं तो हमें अपने जीवन में भटकने और मिलने वाली ठोकरों से बचाने के लिए हमारे माता-पिता व कई अन्य लोगों द्वारा नैतिकता सिखाई जाती है। परंतु समय के साथ-साथ हम में से ज्यादातर लोग उन नैतिक विचारों के ही आदी हो जाते है जो आगे चलकर हमारी मान्यताओं में बदल जाती हैं। फिर हमारी मान्यताएं इतनी दृढ़ हो जाती है कि उन्हें किसी विशेष परिस्थितियों में भी बदलना नामुमकिन हो जाता है। जिसका सीधा प्रभाव हमारे मानसिक तंत्र तथा भविष्य पर पड़ता है। हमारी मान्यताएं इस तरह से हम पर प्रभाव डालती हैं कि हम वर्तमान स्थिति के आधार पर सोचना ही छोड़ देते हैं। 
मैं यह नहीं कह रहा की नैतिकता हमें राह नहीं दिखाती। पर प्रश्न या है कि नैतिकता तथा मान्यता के आधार पर हमारे द्वारा चुना गया मार्ग वास्तव में सही है कि नहीं, इसका निर्धारण कैसे होगा?
चलिए हम इसे समझने का प्रयास करते हैं। हमने खुद को और अपने आस-पास के लोगों को कई कार्यों में संलग्न देखा होगा। भले ही वह काम किसी विशेष पद के साथ हो या उसके बिना, पर फिर भी हम में से ज्यादातर लोगों के मन में यह प्रश्न अवश्य आता है कि जो हम आज अभी कर रहे हैं, क्या वास्तव में हम इसी को करने हेतु इस धरती पर जन्मे हैं?
पूरी दुनिया में 90% से ज्यादा लोग ऐसी चीजों में संलग्न हैं जिससे वे स्वयं खुश नहीं है।
मूल रूप से हमारी समस्या यह है कि "हम कैसे जाने कि हमारा वास्तविक परिचय क्या है? हम किन कार्यों और संभावनाओं हेतु जन्मे हैं? अर्थात हम खुद को पूर्णतया कैसे जाने?
देखिए हम अपने आस-पास की हर चीज पर बहुत ध्यान दे रहे हैं परंतु खुद पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं। हमारे जीवन की गुणवत्ता मूल रूप से इस बात से तय होती है कि हम खुद को कैसे रखते हैं?
इस समय हमने कैसे कपड़े पहने हैं, हमारे पास किस तरह की सुलभ चीजें हैं, हम किस तरह के घर में रहते हैं ये सभी चीजें हमारे जीवन की गुणवत्ता तय नहीं करती। "इस पल हम अपने भीतर कितना आनंदित महसूस कर रहे हैं यही हमारे जीवन की गुणवत्ता तय करती है।" परंतु हमने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है।

हमें लगता है कि ये किसी विशेष परिणाम के रूप में सामने आएगा और हम अपनी खुशी के लिए असंभव लक्ष्य रखते हैं। जैसे कि अगर मुझे खुश रहना है तो मेरी पत्नी को ऐसा होना चाहिए, मेरे पति को ऐसा होना चाहिए, मेरे दोस्त को ऐसा होना चाहिए, मेरे बच्चे को ऐसा होना चाहिए, मेरे माता-पिता को ऐसा होना चाहिए, दुनिया को वैसा होना चाहिए और भी बहुत कुछ। हम अपनी खुशी और शांति के लिए इस तरह की नामुमकिन शर्तें रख रहे हैं। इसके विपरीत अगर हम चीजों को मानने के बजाय उस पर विचार करना प्रारंभ कर दें तो कुछ बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।
देखिए हमें यह समझना होगा कि हमारी नैतिकता तथा मान्यताएं एक निश्चित समय सीमा तक ही हमारी सहायता करती हैं। क्योंकि समय के साथ चीजें तथा संभावनाएं इस तरह से बदलती हैं जहां हमारी मान्यताएं निरर्थक हो जाती हैं।
इसलिए हमें अपनी वर्तमान समस्याओं तथा परिस्थितियों को नैतिकता तथा मान्यताओं के आधार पर नहीं बल्कि अपने उचित विचारों तथा संभावनाओं द्वारा ही निर्धारित करना चाहिए क्योंकि हमारे समकालीन विचार ही हमारा उचित मार्गदर्शन करते हैं। हमें इस पर ध्यान देना होगा।
धन्यवाद!

Yogesh Maurya

Author & Editor

Hi! I introduce myself as Yogesh Maurya and I'm still a student. I'm little complecated. In short, "It is not possible for everyone to read me... I'm the book in which emotions are written instead of words..."

52 komentar:

  1. puzzled truth with cozy understanding 😄👍

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति प्रिय अनुज, जीवन के अनुभवों के अनुरूप लेखन का प्रयोग भविष्य में आपको पेशेवर लेखक बनने में सहायक होगा.....
    आज का व्यक्ति अपनी वास्तविक चेतना से चैतन्य नहीं है, अपितु बाह्य आवरण को ही अपना घर मान बैठा हैं, अंतर्मुखी होने की बजाय बहिर्मुखी होने पर ही उसका सारा ध्यान है और यही कारण है कि वह अपनी मान्यताओं के कारण उपजी परिस्थितियों में हमेशा दुखी ही है वह अपने अंतर की बातों को समझने की कोशिश ही नहीं करता और जो लोग कोशिश करते हैं वह तुम में से ही एक होते हैं स्वछंद और मनमौजी हर हाल में खुश 😊😍😍
    उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं अनुज❤💐

    ReplyDelete
    Replies
    1. भ्राता श्री, आपके स्नेह और प्यार के लिए आपका हृदय से आभार तथा धन्यवाद। यह तो बस एक सूछ्म प्रयास है। आप ऐसे ही आशीर्वाद बनाए रखें। 🙏

      Delete
  3. Nice article. Thanks for sharing.

    ReplyDelete
  4. Mind blowing post bro.. Thank you..

    ReplyDelete
  5. Nice post

    ReplyDelete
  6. good article and now visit my blog for history https://www.ihf12.blogspot.com

    ReplyDelete
  7. Great really touched your blog .
    Hope some more like this

    ReplyDelete
  8. Great piece, we should learn to analyze ourselves before anything else to remove any conflict in life ahead

    ReplyDelete
  9. Such an interesting piece!

    ReplyDelete

Please do not enter any spam link in the comment box.